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आज के इस दौर में हर कोई अपने आप को ग्लोरिफ़ाई करने के काम में लगा हुआ है , लोग बाग़ बिना कुछ परिश्रम किए ही लोकप्रिय हो जाना चाहते है और इस उद्देश्य के लिए वे इस्तेमाल कर रहे है सोशल साइट्स को ... कभी राजनैतिक चर्चा करते हुए तो कभी समाज सेवा करते हुए समय- समय पर इस तरह के अपडेट उनकी तरफ़ से हमें देखने को मिलते रहते है ।
ऐसे लोगों की तरफ़ से आने वाले सभी पोस्ट में से सबसे वाहियात और नीरस होता है शादी समारोह या सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेते हुए ... बड़े ही मनहूस लगते हो यार तुम , जब गिरते पड़ते जैसे तैसे कहीं पहुँचते हो और आयोजक को अपने बग़ल में खड़ा कर तस्वीर खिंचवाते हो तथा उसे इस कैप्शन के साथ अपडेट करते हो की “ शिरकत होने का सुअवसर मिला ।”
मुझे तो इस प्रश्न का जवाब चाहिए कि ऐसा सुअवसर एक ही तरह के व्यक्तियों कैसे मिलता है ? जिनके पास करने के लिए काम ना हो , जो चाटुकारिता में पारंगत हो और जिनके परिवार जन ही उनसे त्रस्त हो ... ! ऐसे महानुभावों का किसी भी में समारोह में पहुँचने से लेकर वहाँ से निकलने तक एक ही उद्येश्य होता है वहाँ आने वाले विशिष्ट अतिथियों , प्रभावशाली व प्रसिद्ध व्यक्तियों के साथ अपनी एक तस्वीर निकल आये बस ... इसी फेर में वे उस मेहमान के आजु - बाज़ू गिद्ध की तरह मँडराते रहते है , मौक़ा देखते ही धर लिया मेहमान को और निकाला अपना फ़ोन ( जिसका की आधा पेमेंट अब भी बाकि है ) हो गये शुरू ... खचैक ! खचैक !
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ऐसे लोगों की फ़ेहरिस्त बेहद लम्बी है और रात - दिन बढ़ती ही जा रही है , इसमें 15 से 45 तक की आयु के लोग सम्मिलित है और सभी लोग भिन्न श्रेणियों के होते हुए भी पूर्ण मनोयोग से दिल लगाकर चाटुकारिता करने में लगे हुए है ।
जो बड़े स्तर के चाटुकार व चमचे है उन्होंने अपने साथ छोटे गुर्गे रखे हुए होते है जो बिना किसी को भनक लगाए उनकी असंख्य छवियाँ उखेर लेते है ।
बड़े चाटूकार बगूले की तरह होते है जो एक दम से मेहमान को लपक लेते है यह कला सीखने के लिए छोटे चमचों को कई महीनों तक उनके नीचे इंटर्नशिप करनी होती है ।
अन्त में तस्वीर अपडेट करने के साथ ही शुरू होता है एक दूसरे की पीठ खुजलाने का खेल ... वाह ! भाईसाहब , Nyc नेता जी , ज़ोरदार श्रीमान , आप तो कमाल हो आदि आदि ।
कोई अन्य व्यक्ति कुछ कहे ना कहे एक चाटूकार , ढोंगी दूसरे निकम्मे , नालायक की पोस्ट पर “वाह ! साहब” ज़रूर लिखता है ।
लेकिन ऐसे चालक मित्र भूल जाते है कि रूतबा बढ़ा हुआ दिखाने के साथ - साथ आपकी ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ ही रही है ... परिवार , रिश्तेदार व मित्र जनों की नज़रों में जब आपकी इज़्ज़त बढ़ती है तो उम्मीदें भी बढ़ जाती है ।
जब भी कभी उनका काम निकलवाने का अवसर आता है तो खोखलें सम्बन्ध बड़ी आसानी से टें हो जाते है और आपके वास्तविक शुभ चिन्तकों का भरोसा व उम्मीद दोनों टूट जाते है तथा आप अपने मन में स्वयं को कसौटते रहते है , छटपटाते रहते है और यकीन मानिए यह सबसे बुरी मनोस्थिति होती है ऐसा मैं नहीं मनोविज्ञान कहता है ।
बेहतर यही है कि अपनी सीमाओं को समझिए , अपनी हैसियत का ध्यान रखिए , सम्बन्ध बनाने के चक्कर में कही आप हँसी के पात्र तो नहीं बन रहे है ?
आपकी चाटुकारिता आपका कितना साथ निभायेगी ? अन्तत: आपका चिन्तन , लगन , परिश्रम और पढ़ाई ही आपके काम आयेगी ।
इसलिए क्षणिक छवि लाभ , व झूठी लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास मत कीजिए ... इतनी अच्छी तरह से मेहनत कीजिए की आपको अपने जीवन में आशा अनुरूप सफलता मिले और दूसरे लोग आपके साथ तस्वीर लेने के लिए ललायित रहें ।
और अगर आप भी लेखक की तरह ऐसे चाटुकारों से पीड़ित है तो कुछ मत कीजिए ... केवल मुस्कुराइये एंव पढ़ते जाइए “ भाई साहब आप तो कमाल हो “ ...!!
Suren B
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