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जब हम स्कूल में थे तब हमें पढ़ाया जाता था कि भारत एक कृषि प्रधान देश है किन्तु जब थोड़ी बुद्धि विकसित हुई तब समझ में आया कि भारत एक चुनाव प्रधान देश है जहाँ समय समय पर कहीं ना कहीं चुनाव होते रहते है ।
पूर्वोत्तर के बाद हाल ही में कर्नाटक में चुनाव सम्पन्न हुए जिनका परिणाम आज आ गया है औऱ भारतीय जनता पार्टी बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है ।
लेकिन सरकार बनाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़ा पार नहीं कर पायी ।
21 प्रदेशों में भाजपा की सरकार है जबकि कांग्रेस केवल 2 राज्यों तक सिमट कर रह गयी है ।
इस स्थिति में कांग्रेस किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहना चाहेगी , अब जब JDS को केवल 38 सीटें जीतने के बावजूद अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिलेगा तो उस संगठन को कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इनकार क्यों होगा ??
BJP की तरफ से किए गये जी तोड़ प्रयासों के बाद भी सत्ता हाथ में आते आते रह रही है ....अब मोटा भाई का गुजराती दिमाग ही खेल बदल सकता है । उन 2 सीटों से भी उम्मीद की जा सकती है जिन पर फिलवक्त चुनाव आयोग ने चुनाव स्थगित करवा रखे है ।
येदियुरप्पा व रेड्डी बंधुओं को साथ लेकर चलने वाली साफ छवि की मोदी सरकार भी 15 लाख से उतर कर 15 मिनट पर आ गयी वहीं राहुल गांधी के नेतृत्व में झूल रही काग्रेस पार्टी 2013-2014 से लेकर अब तक संभल नहीं पाई है ... सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष A man without results साबित हो रहे है ।
भाजपा 2019 की पुरी तैयारी करती हुई नजर आ रही है वहीं कांग्रेस बिना व्यस्तता के पीछड़ रही जबकि होना यह चाहिए था की विपक्षी दल फ्रंटफुट खेलते औऱ सत्तारूढ़ दल बैकफूट पर ।
इसे मोदी जी खुशकिस्मती कहिए या विपक्षी दलो की दुर्गति के दिन मानिए कि कई महत्वपूर्ण फैसलों के गलत साबित होने के बावजूद अब भी भाजपा अभी भी मजबूत स्थिति में है ।
कुल मिलाकर जमा बात यही है कि राहुल गांधी जी की कमजोरी ही मोदी जी की सबसे बड़ी ताकत है ।
कर्नाटक को लेकर उत्पन्न आशंकाओं के बादल जल्द ही छंट जायेंगे , सब बातें साफ होने के बाद ही स्पष्ट तौर कुछ कहा जा सकेगा क्योंकि टी टेबल पर बैठ कर लगाये गये अनुमान अक्सर वास्तविकता का वज्र सहन कर ध्वस्त हो जाते है ।
Suren B
पूर्वोत्तर के बाद हाल ही में कर्नाटक में चुनाव सम्पन्न हुए जिनका परिणाम आज आ गया है औऱ भारतीय जनता पार्टी बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है ।
लेकिन सरकार बनाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़ा पार नहीं कर पायी ।
21 प्रदेशों में भाजपा की सरकार है जबकि कांग्रेस केवल 2 राज्यों तक सिमट कर रह गयी है ।
इस स्थिति में कांग्रेस किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहना चाहेगी , अब जब JDS को केवल 38 सीटें जीतने के बावजूद अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिलेगा तो उस संगठन को कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इनकार क्यों होगा ??
BJP की तरफ से किए गये जी तोड़ प्रयासों के बाद भी सत्ता हाथ में आते आते रह रही है ....अब मोटा भाई का गुजराती दिमाग ही खेल बदल सकता है । उन 2 सीटों से भी उम्मीद की जा सकती है जिन पर फिलवक्त चुनाव आयोग ने चुनाव स्थगित करवा रखे है ।
येदियुरप्पा व रेड्डी बंधुओं को साथ लेकर चलने वाली साफ छवि की मोदी सरकार भी 15 लाख से उतर कर 15 मिनट पर आ गयी वहीं राहुल गांधी के नेतृत्व में झूल रही काग्रेस पार्टी 2013-2014 से लेकर अब तक संभल नहीं पाई है ... सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष A man without results साबित हो रहे है ।
भाजपा 2019 की पुरी तैयारी करती हुई नजर आ रही है वहीं कांग्रेस बिना व्यस्तता के पीछड़ रही जबकि होना यह चाहिए था की विपक्षी दल फ्रंटफुट खेलते औऱ सत्तारूढ़ दल बैकफूट पर ।
इसे मोदी जी खुशकिस्मती कहिए या विपक्षी दलो की दुर्गति के दिन मानिए कि कई महत्वपूर्ण फैसलों के गलत साबित होने के बावजूद अब भी भाजपा अभी भी मजबूत स्थिति में है ।
कुल मिलाकर जमा बात यही है कि राहुल गांधी जी की कमजोरी ही मोदी जी की सबसे बड़ी ताकत है ।
कर्नाटक को लेकर उत्पन्न आशंकाओं के बादल जल्द ही छंट जायेंगे , सब बातें साफ होने के बाद ही स्पष्ट तौर कुछ कहा जा सकेगा क्योंकि टी टेबल पर बैठ कर लगाये गये अनुमान अक्सर वास्तविकता का वज्र सहन कर ध्वस्त हो जाते है ।
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