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बनारस ब्रिज़ हादसा : सबक़ नहीं सिलसिला
कल जब पुरा देश कर्नाटक के चुनावी नतीजों पर नज़रें गढ़ाये हुए था तथा सब लोग अपने अपने निष्कर्ष निकालने में व्यस्त थे तभी संध्या के समय पवित्रता का शहर काशी एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया ।
प्रधान मंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिसे क्योटो बनाने का दावा मोदी सरकार सालों से करती आ रही है । विकास का तो पत्ता नहीं कब आयेगा किन्तु विनाश की यह दर्दनाक तस्वीरें ज़रूर कल देखने को मिली ।
इतनी भयावह तस्वीरें की देखते ही आँखों में खुन सूख जाये , और दिल रोने लग जाये ।
जब 5 फ़ीट ऊँची गाड़ी ही पिचक कर 1 फ़ीट की रह गयी हो तब यह सोचना ही मुश्किल हो जाता है कि अन्दर बैठे मासूम इंसानों का क्या हाल हुआ होगा ? इतनी निष्ठुर कल्पना शक्ति भी किसी की होती है क्या ?
ख़ैर यह सब भावनात्मक बातें है ... देश के सभी बड़े राजनेता दुख व्यक्त कर चुके है , सरकार पीड़ितों के लिए सहायता राशि की घोषणा कर चुकी है । इससे ज़्यादा क्या ही किया जा सकता है इस मजबूर लोकतान्त्रिक राष्ट्र में ?
दोषी फिर से बच निकलेंगे ... अफसरो का सिर्फ तबादला ही होगा ... ठेकेदारों को यूँ ही ठेके मिलते रहेंगे और पार्टियों को फन्ड के लिए पैसा ।
ऐसे लोग न्यायालय से बड़ी आसानी से बच निकलते है और समाज हमारा इतना विकसित है कि ऐसे लोगों को गुनहगार मानता ही नहीं .. ।
कभी देखा है कि कहीं किसी भ्रष्ट अफ़सर का समाजिक बहिष्कार किया गया हो या फिर किसी नालायक नेता को जूते - चप्पलों से मारा गया हो ?
मैं कुछ तथ्यात्मक बातें करना चाहुँगा ....
वर्ष 2001 के बाद से अब तक ब्रिज गिरने की कई बड़ी घटनाएँ हो चुकी है लेकिन सज़ा आज तक किसी भी हादसे के ज़िम्मेदार को नहीं मिली है ।
>> JULY 21, 2001 कोड़ालुन्दी , केरल
57 की मृत्यु & 300 घायल !
कोई कार्यवाई नहीं ।
>> SEPT. 10, 2002 रफिगंज रेल ब्रिज
130 की मृत्यु ।
>> 29 OCT 2005 वालिंगोडा
ट्रेन के ड्राइवर को पता ही नहीं चला की सामने जिस पुल से उसे ट्रेन को गुजारना है वो टूटा हुआ है ।
114 की मृत्यु , 200 घायल
किसी पर ठोस कार्यवाही नहीं ।
>> DEC. 2006 भागलपुर ,
150 साल पुराने पुल के ढहने से हावड़ा जमालपुर सुपरफास्ट दुर्घटनाग्रसित ।
30 मौतें ।
>> DEC. 25 , 2009 कोटा , राजस्थान ।
निर्माणाधीन पुल ढहने से 28 श्रमिकों की मृत्यु ।
मजदूरों की जान की कीमत ही क्या है ? ...कोई कर्यवाही नहीं ।
>> AUG. 3 , 2016 महाड़ , महाराष्ट्र ।
सावित्री नदी पर ब्रिज टूटा ,
कार्यवाही किस पर ?
>> MARCH 31, 2016 कोलकाता ।
विवेकानंद फ्लाईऑवर गिरने से 27 की मृत्यु ।
चलती हुई बसे , कारें नदी में गिर गयी ...
नजदीकी गैराज में काम करने वाले युवकों ने रात भर निकरानी कर आने वाली गाडीयों को रोका सरकारी मदद सुबह के बाद पहुंची थी ।
कार्यवाही किसी पर नहीं ।
>> MAY 18, 2018 चरचोरैम , गोवा । सन्वुरदम रिवर ब्रिज ।
पुर्तगाल काल का ब्रिज जिसका की इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था ... घोषित रुप से आवागमन के लिए बंद था ।
>> SEPT 9 , 2017 पुंजगट्टा हैदराबाद ।
30 लोगों की मृत्यु ।
कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति ।
आपको यह जानकार हैरानी होगी कि प्रत्येक 4 मिनट में एक भारतीय की मृत्यु सड़क हादसे में होती है तथा रोजाना 1214 सड़क दुर्घटनाऐं होती है । जिनका असली कारण निर्माण कार्य में हुई लापरवाही है ।
सरकारों के पास ना तो न्याय देने की इच्छाशक्ति है न ही समय और हम महान भारत के समझदार लोग तो है ही प्रगतिशील हर एक हादसे के बाद आगे बढ़ जाते है ।
अन्तंतः ईश्वर से प्रार्थना है कि मृत भारतीयों की आत्मा को शांति प्रदान करें औऱ अगला जन्म अगर होता हो तो उन्हें किसी सुरक्षित राष्ट्र में पैदा करें जिससे उन्हें सुख - सुविधाएं ना सही कम से कम प्राकृतिक मौत नसीब हो ।
भारत माता की जय !
: Suren B
कल जब पुरा देश कर्नाटक के चुनावी नतीजों पर नज़रें गढ़ाये हुए था तथा सब लोग अपने अपने निष्कर्ष निकालने में व्यस्त थे तभी संध्या के समय पवित्रता का शहर काशी एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया ।
प्रधान मंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिसे क्योटो बनाने का दावा मोदी सरकार सालों से करती आ रही है । विकास का तो पत्ता नहीं कब आयेगा किन्तु विनाश की यह दर्दनाक तस्वीरें ज़रूर कल देखने को मिली ।
इतनी भयावह तस्वीरें की देखते ही आँखों में खुन सूख जाये , और दिल रोने लग जाये ।
जब 5 फ़ीट ऊँची गाड़ी ही पिचक कर 1 फ़ीट की रह गयी हो तब यह सोचना ही मुश्किल हो जाता है कि अन्दर बैठे मासूम इंसानों का क्या हाल हुआ होगा ? इतनी निष्ठुर कल्पना शक्ति भी किसी की होती है क्या ?
ख़ैर यह सब भावनात्मक बातें है ... देश के सभी बड़े राजनेता दुख व्यक्त कर चुके है , सरकार पीड़ितों के लिए सहायता राशि की घोषणा कर चुकी है । इससे ज़्यादा क्या ही किया जा सकता है इस मजबूर लोकतान्त्रिक राष्ट्र में ?
दोषी फिर से बच निकलेंगे ... अफसरो का सिर्फ तबादला ही होगा ... ठेकेदारों को यूँ ही ठेके मिलते रहेंगे और पार्टियों को फन्ड के लिए पैसा ।
ऐसे लोग न्यायालय से बड़ी आसानी से बच निकलते है और समाज हमारा इतना विकसित है कि ऐसे लोगों को गुनहगार मानता ही नहीं .. ।
कभी देखा है कि कहीं किसी भ्रष्ट अफ़सर का समाजिक बहिष्कार किया गया हो या फिर किसी नालायक नेता को जूते - चप्पलों से मारा गया हो ?
मैं कुछ तथ्यात्मक बातें करना चाहुँगा ....
वर्ष 2001 के बाद से अब तक ब्रिज गिरने की कई बड़ी घटनाएँ हो चुकी है लेकिन सज़ा आज तक किसी भी हादसे के ज़िम्मेदार को नहीं मिली है ।
>> JULY 21, 2001 कोड़ालुन्दी , केरल
57 की मृत्यु & 300 घायल !
कोई कार्यवाई नहीं ।
>> SEPT. 10, 2002 रफिगंज रेल ब्रिज
130 की मृत्यु ।
>> 29 OCT 2005 वालिंगोडा
ट्रेन के ड्राइवर को पता ही नहीं चला की सामने जिस पुल से उसे ट्रेन को गुजारना है वो टूटा हुआ है ।
114 की मृत्यु , 200 घायल
किसी पर ठोस कार्यवाही नहीं ।
>> DEC. 2006 भागलपुर ,
150 साल पुराने पुल के ढहने से हावड़ा जमालपुर सुपरफास्ट दुर्घटनाग्रसित ।
30 मौतें ।
>> DEC. 25 , 2009 कोटा , राजस्थान ।
निर्माणाधीन पुल ढहने से 28 श्रमिकों की मृत्यु ।
मजदूरों की जान की कीमत ही क्या है ? ...कोई कर्यवाही नहीं ।
>> AUG. 3 , 2016 महाड़ , महाराष्ट्र ।
सावित्री नदी पर ब्रिज टूटा ,
कार्यवाही किस पर ?
>> MARCH 31, 2016 कोलकाता ।
विवेकानंद फ्लाईऑवर गिरने से 27 की मृत्यु ।
चलती हुई बसे , कारें नदी में गिर गयी ...
नजदीकी गैराज में काम करने वाले युवकों ने रात भर निकरानी कर आने वाली गाडीयों को रोका सरकारी मदद सुबह के बाद पहुंची थी ।
कार्यवाही किसी पर नहीं ।
>> MAY 18, 2018 चरचोरैम , गोवा । सन्वुरदम रिवर ब्रिज ।
पुर्तगाल काल का ब्रिज जिसका की इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था ... घोषित रुप से आवागमन के लिए बंद था ।
>> SEPT 9 , 2017 पुंजगट्टा हैदराबाद ।
30 लोगों की मृत्यु ।
कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति ।
आपको यह जानकार हैरानी होगी कि प्रत्येक 4 मिनट में एक भारतीय की मृत्यु सड़क हादसे में होती है तथा रोजाना 1214 सड़क दुर्घटनाऐं होती है । जिनका असली कारण निर्माण कार्य में हुई लापरवाही है ।
सरकारों के पास ना तो न्याय देने की इच्छाशक्ति है न ही समय और हम महान भारत के समझदार लोग तो है ही प्रगतिशील हर एक हादसे के बाद आगे बढ़ जाते है ।
अन्तंतः ईश्वर से प्रार्थना है कि मृत भारतीयों की आत्मा को शांति प्रदान करें औऱ अगला जन्म अगर होता हो तो उन्हें किसी सुरक्षित राष्ट्र में पैदा करें जिससे उन्हें सुख - सुविधाएं ना सही कम से कम प्राकृतिक मौत नसीब हो ।
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